Saturday, February 2, 2013

एक कविता अँधेरे के नाम

इन अंधेरों का भी तो कोई कायदा होगा?
कि हमने-तुमने ना सही,
किसी और ने तो समझा होगा?

लोग तो हैं बे-वजह बदनाम करने को,
कोई तो होगा,
जिसने इन्हें हम-नाम कहा होगा?

Tuesday, January 29, 2013

Jan' 29, 2013

ना तमन्ना है दूर तुमसे होने की,
ना चाहूँ बिछड़ के जीना तुमसे।
सब जानती-समझती है फिर भी,
क्यूँ ले रही जिंदगी ये इन्तेहाँ हमसे?

Monday, January 14, 2013

who am i?

Wish there was someone in our life very similar to the command on my console, who can reply questions like "who am i".

Tuesday, November 13, 2012

अजीब-सी है जिंदगी मेरी, 
अँधेरा मंजिल है  
और रौशनी का रास्ता है।। 

Thursday, November 8, 2012

November 08, 2012

देखा है खूब चाल-चलन ज़माने का हमने भी।
क़त्ल कर औरों का कहते हैं, बस हो गया यूँ ही।।
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